Achyutam keshvam

हम समय शम्भु के चाप चढ़े सायक हैं. हम पीड़ित मानवता के नव नायक हैं हम मृतकों को संजीवन मन्त्र सुनाते हम गीत नहीं युग गीता के गायक हैं

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हम दूरदृष्टि दोषयुक्त श्रद्धांजलि गिरोह हैं ?

Posted On 12 Sep, 2017 social issues में

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प्रद्युम्न को श्रद्धांजलि
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मानव सभ्यता अपने इतिहास के शायद सबसे दुर्गम निर्मोह सम्वेदनहीन सहानुभूतिहीन दौर से गुजर रही है.जिसमें प्रेम सम्वेदना और सहानुभूति जितनी मूर्खतापूर्ण अव्यवहारिक निरोपयोगी और व्यर्थ हो चलीं हैं इनका छद्म प्रदर्शन उतना ही महत्वपूर्ण हो गया है.
कभी कहा जाता था कि “जाके पैर न फटी बिवाई ,सो क्या जाने पीर पराई “पर आज स्वानुभूति और सहानुभूति के जुमलों के बीच सत्य यह है कि जिनके अपने पाँव भी घायल हैं वे भी परपीड़ा को छोडो अपनी पीड़ा समझने की स्थिति में नहीं ….एक बेहोशी एक निश्चेष्टता से जनित सुविधा भोगी-विश्राम शील निश्चिंतता ने दिल और दिमाग पर कब्जा कर लिया है .भूख का भय और तृप्ति के प्रलोभन ने ऊँचे कद्दावर इंसान की प्रजाति को बौनों का समुदाय बना दीया है .
जिसमें हम सब बौने दूरदृष्टि दोष से युक्त हैं .जब व्यक्ति को निकट की चीजें नहीं दिखती तो उसे दूरदृष्टि दोष कहा जाता है .
हम निर्भया से शर्मिंदा है…पर सकीट की …….से नहीं.
हम गुरुग्राम के प्रद्युम्न ठाकुर के लिए आँखों में अश्रुधारा लिए हैं पर शांती नगर के ……………की चर्चा नहीं करते.
न हम शव हैं ,न सोये हैं ,न अनभिज्ञ हैं
पर राम रहीम इंसा की तरह एटा के ……….को बलात्कारी कहना ..बहुत ..बहुत कठिन है .
भूख का भय और तृप्ति के प्रलोभन ने हम जैसे ऊँचे कद्दावर आदमी को बौना बना दीया है .
आप उपरोक्त रिक्त स्थानों के बारे में न पूँछे.दर्पण के सामने बैठें और खुद से पूँछे कि कहीं आप भी बौने तो नहीं क्योंकि आप एक बौने का लेख पढ़ रहे हैं किसी कद्दावर आदमी का नहीं.
निर्भया को श्रद्धांजलि ,प्रद्युम्न ठाकुर को श्रद्धांजलि .निंदनीय …दुखद….उफ़…हाय..हम शर्मिंदा हैं…..अबे!मोमबत्ती ला बे जल्दी कर …हाँ फोटो वाला कहाँ है …ताली-ताली …नहीं नहीं ताली नहीं सॉरी …श्रद्धांजलि में तालियों का रिवाज नहीं ….चल भाई एक मोमबत्ती इधर भी दे ….फोटो में मैं भी आऊँ देख लेना ….रिपोर्टर जी मेरा नाम लिख लो …अरे इस श्रद्धांजलि के झंझट में ऑफिस लेट हो गया ….जल्दी कर…..सुना एटा में भी कुछ घटना ….चुप उसका वो भी मोमबत्ती लिए खड़ा है ..फिर हमसे क्या …ये तो दुनिया है …यार!वो अपनी पार्टी का आदमी है ….
…..धत स्स्सली संवेदना
क्या निर्भया दिल्ली की एक लड़की और प्रद्युम्न ठाकुर गुरुग्राम का एक बच्चा था .मुझे एसा बिलकुल नहीं लगता .मुझे चारो और से हजारों करोड़ों निर्भया और प्रद्युम्नों ने घेर रखा है .
१.काम से इलाहबाद से लौटते ही पता चला कि मेरे अपने इंटर कालेज में एक टीचर ……ने ट्यूशन के लिए एक गरीब मित्र को इतना प्रताड़ित किया कि उसने फाँसी लगा ली.प्रधानाचार्य ने अपराधी को फरारी में मदद की.
२.एक अन्य मामला जिसमें एक बच्चे ने हास्टल वार्डन और किसी को आपत्तिजनक स्थिति देखा .कुछ दिन बाद उसकी हास्टल में मौत हुई जिसे आत्महत्या बताया गया .कुछ अखबार बाजी और बस.
३.एक निजी स्कूल की प्राचार्या ने प्रबन्धक पर रेप का आरोप लगाया .जाँच में यौन अभ्यस्त पाई गयी.
४.एक निजी विद्यालय की ग्यारहवी की छात्रा जो विद्यालय की रसोईया की कन्या थी .आत्महत्या कर ली.माँ गायब हो गयी.
५.निजी बड़े विद्यालय में प्रबन्धक द्वारा एक छात्रा से सीरीयल रेप का मामला सामने आया.वीडियो वायरल.पंचायत हुई.अखबार बाजी के बाद हल्की फुल्की कार्यवाही.
६.एक निजी विद्यालय में रहस्यमय किन्तु समझदार जहरीली गैस प्रवेश कर गयी जिसने को एजुकेशन के विद्यालय में लड़कियों की कक्षा को ही चुना.होली डे घोषित .५० लड़कियों को आक्सीजन.
७.एक निजी स्कूल के छोटी विंग के हेड के लड़के ने बड़ी विंग में पढ़ते हुए टार्चर की शिकायत की.रहस्यमयी स्थिति में उसकी मृत्यु हुई जिसे आत्महत्या करार दीया गया.
८.निजी स्कूल के वाहन से मौत .मामला ले दे रफे दफे .
९.सालों पुराने स्कूल बस एक्सीडेंट में १०० मासूमों की मौत गाड़ी ड्राईवर,कन्डक्टर ,स्कूल सब फर्जी.
ऐसी असंख्य घटनाएँ आँखों में नाच रही हैं .
…………..मैं एक बौने कद का आदमी इन सब पर चुप रहा .चुप हूँ.चुप ही रहूँगा ……….
हरियाणा के राम रहीम को एटा में बैठ गरियाना सरल है.एटा के राम रहीम को गरियाना नहीं .
गुरुग्राम के प्रद्युम्न तुम्हे श्रद्धांजलि ……एटा के प्रद्युम्न ….तुम ऐसी अपेक्षा न करो .
हम चिन्तन से सलेक्टिव और चरित्र से स्वार्थी है एटा के प्रद्युम्नों .
हरियाणा के प्रद्युम्न को श्रद्धांजलि
घटना निंदनीय
अपराधियों को सजा मिले
मासूम के हत्यारे मुर्दाबाद
हुश ….जल्दी मोमबत्ती ला …फोटो ले …अरे एक मेरे मोबायल में भी …..फेसबुक पर डालनी है .



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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Rinki Raut के द्वारा
September 16, 2017

बाल संवेदनशील समाज की कल्पना अभी बहुत परे नज़र आती है


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