Achyutam keshvam

हम समय शम्भु के चाप चढ़े सायक हैं. हम पीड़ित मानवता के नव नायक हैं हम मृतकों को संजीवन मन्त्र सुनाते हम गीत नहीं युग गीता के गायक हैं

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मैं मस्जिदों में भजन करूं ,तू मन्दिरों से अजान कर .

Posted On 10 Apr, 2017 कविता में

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अब साँप बनके नाचते ,मजहबी बीन की तान पर .
इन्सान थे हम याद कर ,इंसानियत का गुमान कर .
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इन बरछीयों को तोड़ दें .और घोड़े वापस मोड़ दें .
लड़-लड़ के क्या हासिल हुआ ,सब मिट गया है ये ध्यान कर .
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हो मुहब्बते ही मुहब्बतें ,चल एसा हिन्दोस्तान कर .
मैं मस्जिदों में भजन करूं ,तू मन्दिरों से अजान कर .
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जियें जिन्दगी इस ढंग से,मिल खेलें होली रंग से .
मैं गुलाब लेके आऊँगा ,इस ईद तेरे मकान पर .
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चढ़ी त्यौरीयों को ढील दे ,जला प्यार की कंदील दे .
आ शबनमी मलहम मलूँ ,तेरी आँखों की थकान पर .



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