Achyutam keshvam

हम समय शम्भु के चाप चढ़े सायक हैं. हम पीड़ित मानवता के नव नायक हैं हम मृतकों को संजीवन मन्त्र सुनाते हम गीत नहीं युग गीता के गायक हैं

96 Posts

251 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 14295 postid : 1315583

मेरी बला से

Posted On 21 Feb, 2017 कविता में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

हैं सुने नाराज हों मेरी बला से .
या कृपालू आज तो मेरी बला से .
-
दें प्रशंसा ताज तो मेरी बला से .
गालियों की गाज तो मेरी बला से .
-
करें मेरे काज तो मेरी बला से .
कोढ़ में हों खाज तो मेरी बला से .
-
करें हमपर नाज तो मेरी बला से .
या कहें लफ्फाज तो मेरी बला से .
-
जो रखें वे लाज तो मेरी बला से .
खोल दें सब राज तो मेरी बला से



Tags:                     

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (13 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

4 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

sadguruji के द्वारा
March 1, 2017

जो रखें वे लाज तो मेरी बला से . खोल दें सब राज तो मेरी बला से आदरणीय अच्युतम केशवम जी ! बहुत खूब ! बहुत बहुत अभिनन्दन और बधाई !

Alka के द्वारा
March 1, 2017

अच्युत जी , बहुत खूब | हम जो है सो हैं किसी की परवाह क्या करना .. बधाई .

Shobha के द्वारा
February 22, 2017

श्री अच्युत जी खूबसूरत पँक्तिया


topic of the week



latest from jagran