Achyutam keshvam

हम समय शम्भु के चाप चढ़े सायक हैं. हम पीड़ित मानवता के नव नायक हैं हम मृतकों को संजीवन मन्त्र सुनाते हम गीत नहीं युग गीता के गायक हैं

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सपने का क्या है टूट गया . सपना तो फिर भी सपना है

Posted On 3 Feb, 2017 कविता में

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सपने का क्या है टूट गया .
सपना तो फिर भी सपना है .
-
समय दिखाता रहा अँगूठे ,
राम गुसइंयाँ तुम भी झूँठे ,
जब हों पाप दया पर भारी .
फिर तो नाम वृथा जपना है .
सपने का क्या है टूट गया .
सपना तो फिर भी सपना है .1.
-
तज उपहास उपेक्षा दूजी .
मेरे पास रही क्या पूँजी .
कैसे कहूँ अरी ओरों को ,
अपना कौन हुआ अपना है .
सपने का क्या है टूट गया .
सपना तो फिर भी सपना है .२.
-
सोम-सुधा जगभर में बाँटी .
धरती की जंजीरें काटीं .
फिर भी रहा अकिंचन मैं ही ,
कँपना कभी कभी तपना है.
सपने का क्या है टूट गया .
सपना तो फिर भी सपना है .3.



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