Achyutam keshvam

हम समय शम्भु के चाप चढ़े सायक हैं. हम पीड़ित मानवता के नव नायक हैं हम मृतकों को संजीवन मन्त्र सुनाते हम गीत नहीं युग गीता के गायक हैं

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स्वामी विवेकानंद सरस्वती जी की जन्म जयंती पर

Posted On 12 Jan, 2017 Special Days में

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केसरी वेदांत के वे विवेकानंद स्वामी जी थे
दासता की नींद सोये देश को जगा गये
गर्व से कहो कि हम हिन्दु हैं उठा के शीश
मन्त्र ये अमोघ सारे देश को सिखा गये
दासता के दीनता के हीनता मलीनता के
ईधन में आग स्वाभिमान की लगा गये
मंच पर शिकागो के दहाड़े सिंह के समान
हिन्दुओं के चरणों में विश्व को झुका गये

-

बड़ी -बड़ी आँखों में थे सपने भविष्य के तो
उर में भरा हुआ था गौरव अतीत का
हिन्दु द्रोहियों के लिए पांचजन्य घोष था तो
हिन्दुओं के मीत को पुनीत वेणु गीत था
चिंतन में दीखता था पोषण प्राचीनता का
शब्द -शब्द आधुनिक चेतना प्रतीक था
था नरेन्द्र भुवनेश्वरी विश्वनाथ का सपूत
शिष्य राम कृष्ण जी का वीर था विनीत था



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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Shobha के द्वारा
January 13, 2017

priy अच्युत जी विवेकानन्द जी को आपने याद किया बहुत अच्छा लगा सुंदर पंक्तियाँ आपने उन्हें समर्पित की हैं

    achyutamkeshvam के द्वारा
    January 14, 2017

    सादर अभिवादन,आभार


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