Achyutam keshvam

हम समय शम्भु के चाप चढ़े सायक हैं. हम पीड़ित मानवता के नव नायक हैं हम मृतकों को संजीवन मन्त्र सुनाते हम गीत नहीं युग गीता के गायक हैं

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किन्तु तोड़ना कभी नहीं रे सच के साथ सगाई

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“कर्मयोग निष्काम “पोत है कर्मभोग पतवार
ध्रुव तारे की और चला चल होगा सागर पार
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क्यों मन मितवा तुझे अभीप्सित वह देवों का लोक
देहदीप को पूर नेह से फैला दे आलोक
यज्ञ वेदिका उर हो जाए
हार जाएगा मार
ध्रुव ……………१
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कबतक देगा देख भाग्य भी कटु पतझड़ का साथ
कितनी उमर लिखा कर लाई अमा-अँधेरी रात
छिपा सूर्य को रख पायेगा
कबतक देख तुषार
ध्रुव……………….२
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सजा धजा ले धरा त्वरा से रंग-रंगोली से
गले भेंट ले री जल्दी अपनी हमजोली से
पिया पुकारे द्वार संग हैं
डोली और कहार
ध्रुव ……………३
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संध्या में सारंग गुनगुना सुबह भैरवी-राग
होली दीपावली दशहरा और श्रावणी फाग
गाले और बजाले जबतक
अक्षत तार सितार
ध्रुव ………………४
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बने बिराने भी अपने यूँ बजा प्रेम का ढोल
नीर-क्षीर दोनों में मीठे बोल बताशे घोल
चल्लमचल्ला में करजा कुछ
याद करे संसार
ध्रुव …………..५
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विश्व प्रशंसा करे याकि हो तेरी जगत हँसाई
किन्तु तोड़ना कभी नहीं रे सच के साथ सगाई
मान मिले अपमान मिले या
फूल मिलें या खार
ध्रुव ……………..६



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4 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

ashasahay के द्वारा
December 13, 2016

बहुत सुन्दर भावनाएँ और प्रस्तुति भी। सुन्दर कविता के लिए बधाई।

    achyutamkeshvam के द्वारा
    December 14, 2016

    हृदय से आभार

Shobha के द्वारा
December 11, 2016

प्रिय अच्युत अति सुंदर हैडिंग उतनी ही सुंदर कविता की पंक्तियाँ

    achyutamkeshvam के द्वारा
    December 11, 2016

    हृदयतल से आभार


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