Achyutam keshvam

हम समय शम्भु के चाप चढ़े सायक हैं. हम पीड़ित मानवता के नव नायक हैं हम मृतकों को संजीवन मन्त्र सुनाते हम गीत नहीं युग गीता के गायक हैं

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ओ जनमेजय अब जुट जाएँ सर्प-यज्ञ के आयोजन में

Posted On 10 Sep, 2016 Hindi Sahitya, Politics, कविता में

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घूम रहे हैं फन फैलाए देखो तक्षक राज-भवन में
ओ जनमेजय अब जुट जाएँ सर्प-यज्ञ के आयोजन में
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यह भारत है कौशल्या के राम घुमते हैं प्रांगण में
और कन्हैया ठुमक रहा है जसुदा मैया के आँगन में
माया के गौतम त्रिशला के वर्धमान की गंध पवन में
यहाँ मुरा के चन्द्रगुप्त की कीर्ति पताका नील गगन में
भारत माँ के नौनिहाल कोटिश बलिदानी लाल जहाँ पर
देशद्रोही षड्यंत्रकारीयों की न गलेगी दाल यहाँ पर
सर्प भस्म हों जलें सपोले यज्ञ धूम्र उड़ चले गगन में
ओ जनमेजय अब जुट जाएँ सर्प-यज्ञ के आयोजन में (१)
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ग्रह त्यागी हों राम-लखन फिर पंचवटी में कुटी बनाएं
शूर्पणखा का दर्प तोड़ दें खर-दूषण को धूल चटायें
युग दधीच फिर अस्थिदान दें और बृहस्पति मार्ग दिखाएँ
भर-भरकर अंजुलीपुटों में नव अगस्त्य सागर पी जाएँ
वज्रपाणी बन सिन्धु संतती असुरों की दुर्गति कर डाले
वृतासुर को धराशायी कर कालकेयों का वध कर डाले
यदि तक्षक को दे संरक्षण इन्द्रासन गिर पड़े अगन में
ओ जनमेजय अब जुट जाएँ सर्प-यज्ञ के आयोजन में (२)
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मन-मंथन से उठा हलाहल आज उसी की मसी बनाएं
लौह-लेखनी लेकर कर में अग्नि शब्द हम लिखते जाएँ
मारण मन्त्रों को उच्चारे उच्चाटन की बात छोड़ दे
टंकारो से काम न चलता पार्थ ब्रह्मशर ताक छोड़ दे
महाकाल के महाचाप की प्रत्यंचा पर चढ़े तीर हम
अँगडाई लेते युग बदले आज समय को चले चीर हम
उत्तर दक्षिण पूरब पश्चिम गूँज उठे ललकार गगन में
ओ जनमेजय अब जुट जाएँ सर्प-यज्ञ के आयोजन में (३)



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4 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Shobha के द्वारा
September 19, 2016

श्री अच्युत जी पुराणिक कथाओं को लेकर लिखी गयी सुंदर पँक्तिया अति सुंदर

    achyutamkeshvam के द्वारा
    October 5, 2016

    हार्दिक आभार

Jitendra Mathur के द्वारा
September 17, 2016

ऐसे ओजस्वी, ऐसे प्रेरणास्पद एवं ऐसे सार्थक काव्य का सृजन आपके अतिरिक्त कौन कर सकता है आदरणीय अच्युत जी । जो भी राष्ट्रभक्त इसका पठन करेगा, अभिभूत हो जाएगा, उत्साह से भर उठेगा ।

    achyutamkeshvam के द्वारा
    September 18, 2016

    आभार


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