Achyutam keshvam

हम समय शम्भु के चाप चढ़े सायक हैं. हम पीड़ित मानवता के नव नायक हैं हम मृतकों को संजीवन मन्त्र सुनाते हम गीत नहीं युग गीता के गायक हैं

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हम मुंडेर के काले कौए कोयल वाले गान न पाये

Posted On 28 Aug, 2016 Entertainment, Hindi Sahitya, कविता में

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आप हमें पहचान न पाये
या फिर अपना मान न पाये
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हम तो सदा आपके ही थे
किन्तु नेह प्रतिदान न पाये
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बस अभिनन्दन ग्रन्थ न थे हम
अत:मान का पान न पाये
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हम मुंडेर के काले कौए
कोयल वाले गान न पाये
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द्वार तलक आ-आकर लौटे
कभी आपका ध्यान न पाये
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कुछ अपनी आवाज मंद थी
कुछ तुमने भी कान न पाये



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4 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Shobha के द्वारा
August 31, 2016

श्री अच्युत जी अति सुंदर भाव ‘आप हमें पहचान न पाये या फिर अपना मान न पाये

    achyutamkeshvam के द्वारा
    September 3, 2016

    आपके प्रोत्साहन हेतु ह्रदयतल से आभार

Jitendra Mathur के द्वारा
August 30, 2016

सरल शब्दों में गहरी बात कह दी आपने अच्युत जी । गागर में सागर । सांसारिक सम्बन्धों के व्यापार पर पैनी व्यंग्य-दृष्टि पड़ी है इस बार आपकी । बहुत खूब ! साधुवाद । अभिनंदन ।


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