Achyutam keshvam

हम समय शम्भु के चाप चढ़े सायक हैं. हम पीड़ित मानवता के नव नायक हैं हम मृतकों को संजीवन मन्त्र सुनाते हम गीत नहीं युग गीता के गायक हैं

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शब्द पथ पर अर्थ का पाथेय

Posted On: 30 Oct, 2015 Hindi Sahitya,Others में

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शब्द पथ पर अर्थ का पाथेय .
किन्तु कितनी दूर फिर भी ध्येय .
-
सरल वर्तुल अक्षरों की लीक .
मनचले पग कब चले हैं ठीक .
ये सितारों का दिया है श्रेय .
शब्द पथ पर अर्थ का पाथेय .
किन्तु कितनी दूर फिर भी ध्येय .(१)
-
प्यास है लेकिन कहाँ है कूप .
उन पगों में चुभ रही है दूब .
कंटकों को मानते थे हेय.
शब्द पथ पर अर्थ का पाथेय .
किन्तु कितनी दूर फिर भी ध्येय .(२)
-
कंठ में जो गीत रुपी हार .
संस्कारों का सहज विस्तार .
अन्यथा भाषा रही कब गेय .
शब्द पथ पर अर्थ का पाथेय .
किन्तु कितनी दूर फिर भी ध्येय .(३)



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6 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Jitendra Mathur के द्वारा
February 22, 2016

अत्यंत सुंदर सार्थक एवं मर्मस्पर्शी गीत । कहीं-कहीं शुद्धिकरण की आवश्यकता लगती है । देख लें । बाकी आपको बहुत-बहुत शुभकामनाएं एवं साधुवाद ।

    achyutamkeshvam के द्वारा
    March 4, 2016

    आभार……

Bhola nath Pal के द्वारा
February 22, 2016

कंठ में जो गीत रुपी हार . संस्कारों का सहज विस्तार . अन्यथा भाषा रही कब गेय . शब्द पथ पर अर्थ का पाथेय…. शव्द व् भाषा चयन उत्तम ………..

    achyutamkeshvam के द्वारा
    March 12, 2016

    आपके उत्साहवर्धन हेतु आभार

Madan Mohan saxena के द्वारा
November 4, 2015

सुन्दर सटीक और सार्थक .समयानुकूल सार्थक पोस्ट बधाई कभी इधर भी पधारें


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