Achyutam keshvam

हम समय शम्भु के चाप चढ़े सायक हैं. हम पीड़ित मानवता के नव नायक हैं हम मृतकों को संजीवन मन्त्र सुनाते हम गीत नहीं युग गीता के गायक हैं

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प्यार नहीं है तुमको मुझसे, तुमने बता दिया अच्छा है.

Posted On: 27 Sep, 2015 कविता,Others में

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प्यार नहीं है तुमको मुझसे,
तुमने बता दिया अच्छा है.
——————————-
मैं तो गफलत में जी लेता ,
विष को अमिय समझ पी लेता .
मजबूरी के धागों को ही ,
प्रेम समझ दामन सीं लेता .
मेर झूँठे सपनों का सच ,
तुमने बता दिया अच्छा है.
प्यार नहीं है तुमको मुझसे,
तुमने बता दिया अच्छा है.
——————————-
उपवासों के कुल में आती ,
त्योहारों के घर की डोली ?
कैसे पतझड़ के मौसम की
बनती ऋतू रानी हमजोली ?
दीपक का सूरज की किरणों –
से सम्मिलन असम्भव ही था .
फटी कमीजों से गठबन्धन ,
करती चमचम चूनर चोली ?
अपनी प्रोफाइल से मिटला ,
मेरा पता दिया अच्छा है.
प्यार नहीं है तुमको मुझसे,
तुमने बता दिया अच्छा है.



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6 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Jitendra Mathur के द्वारा
February 22, 2016

कितना दर्द है आपके अल्फ़ाज़ में । ऐसे अल्फ़ाज़ कलम से नहीं, दिल से निकलते हैं । मैं अपने आपको इस योग्य नहीं पा रहा कि ऐसी उत्कृष्ट रचना पर कोई टिप्पणी कर सकूं । ईश्वर आप पर और आपकी लेखनी पर सदा अपनी कृपा बनाए रखें, यही मेरी शुभकामना है ।

    achyutamkeshvam के द्वारा
    March 4, 2016

    आभार…..

Bhola nath Pal के द्वारा
February 22, 2016

भूख नहीं है तुम्हें ,शव्दों से पूजा करते हो तुम …………..

    achyutamkeshvam के द्वारा
    March 12, 2016

    उत्साहवर्धन हेतु आभार

Madan Mohan saxena के द्वारा
November 5, 2015

बहुत सुन्दर रचना खूब खूब बधाई कभी इधर भी पधारें

    achyutamkeshvam के द्वारा
    February 1, 2016

    आपके उत्साहवर्धन हेतु आभार


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